कौन हो तुम, कहां हो तुम मै कहने की खता करु या खुद कुछ कहोगी तुम। एक भोली सी कन्या हो तुम या हुरों मे नूर हो तुम। चंचल चचंल नैनो वाली मृगतृषणा सी प्यास हो तुम। तप तप तपते रेगिस्तान मे सुखे गले कि आस हो तुम। वीना हो तुम, बीणा हो तुम हर कलाकार कि शान हो तुम बनारस की सुबह और अवध की शाम हो तुम। अरमान हो तुम फरमान हो तुम धडकते हुऐ दिल का ईमान हो तुम। मै अकेला हुं खडा़ इस दुनिया के झंझाल मे हमराज़ हो तुम एकजा़न हो तुम मै अगर शायर तो मेरा गुमान हो तुम। मै भटकता हुं कहीं इन अंधेरी राहों मे मेरी सूनी राहों की एक चमकती पहचान हो तुम। कोहिनूर कि खान हो तुम और मेरी मुसकान हो तुम। मेरे अधुरे जीवन कि एक पूरी दासतान हो तुम। कुछ पूछने कि हिम्मत करूं उम्मीद है कि नाराज़ न होगी तुम। जैसे अब तक साथ दिया है क्या आगे भी साथ निभाओगी तुम। मै कहीं अगर गिर जाऊ तो प्यार से संभाल लेना। इस जनम काफी कष्ट सही क्या अगले जनम मे साथ आओगी तुम।