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Showing posts from March 25, 2018

प्रियतमा

कौन हो तुम, कहां हो तुम मै कहने की खता करु या खुद कुछ कहोगी तुम। एक भोली सी कन्या हो तुम या हुरों मे नूर हो तुम। चंचल चचंल नैनो वाली मृगतृषणा सी प्यास हो तुम। तप तप तपते रेगिस्तान मे सुखे गले कि आस हो तुम। वीना हो तुम, बीणा हो तुम हर कलाकार कि शान हो तुम बनारस की सुबह और अवध की शाम हो तुम। अरमान हो तुम फरमान हो तुम धडकते हुऐ दिल का ईमान हो तुम। मै अकेला हुं खडा़ इस दुनिया के झंझाल मे हमराज़ हो तुम एकजा़न हो तुम मै अगर शायर तो मेरा गुमान हो तुम। मै भटकता हुं कहीं इन अंधेरी राहों मे मेरी सूनी राहों की एक चमकती पहचान हो तुम। कोहिनूर कि खान हो तुम और मेरी मुसकान हो तुम। मेरे अधुरे जीवन कि एक पूरी दासतान हो तुम। कुछ पूछने कि हिम्मत करूं उम्मीद है कि नाराज़ न होगी तुम।  जैसे अब तक साथ दिया है क्या आगे भी साथ निभाओगी तुम। मै कहीं अगर गिर जाऊ तो प्यार से संभाल लेना। इस जनम काफी कष्ट सही क्या अगले जनम मे साथ आओगी तुम।

मुसाफिर तुझे सलाम

फिर एक शाम अभी ढल गई फिर एक सवेरा कल आएगा आज कोई हाथ छोड चला गया कल कोई जीवन नया पाएगा कभी कोई गम दूर चले गए अभी कोई गम हमे अपनाएगा ये जीवन का चलता पहियां है कभी धूप तो कभी छावं दिखलाएगा आशा और निराशा कि अजीब है कहानी कभी पतझड़ तो कभी वसंत छा जाऐगा हिम्मत और आस कि बुनीयाद है मेरे भाई सच्चे दिल से जीवन आसानी से कट जाऐगा हसना, रोना दो पहलू है जीवन के कभी एक दिखेगा तो कभी दूसरा आजाऐगा क्या कपड़ा क्या गहना क्या पैसा और मकान खाली हाथ आया था बंदे तू खाली हाथही जाएगा।