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Showing posts from April 30, 2017
तू साथ थी न मगर, मेरा साथ बना ये हमराही तू छोड़ कर बड़ी दूर गई, मेरे साथ रहा ये हमराही न सुनता था मेरी बात कोई, सिर्फ समझ सका ये हमराही सबने हाथ छोड़ दिया, तब हाथ बना ये हमराही। रातो मे मै था अकेला, नींद ना आती चैन ना आता कौन लोरी गाता और सुलाता वो प्यार बना ये हमराही अंधेरो से मै घिर चुका था,ना साथ कोई था सधने को उस तमस को चीड़ फाड़ कर, मेरा साथ बना ये हमराही। चलते चलते थक गया था, रुक गया था, गिर गया था लाखो ठोकर खाके मन, चलने से ही डर गया था तब धक्का देकर कोई बोला, यहीं कहीं पर रुक नाही जो पीछे मुड़ कर देख रहा हुं, फिर वही खड़ा था हमराही। दारू मदिरा और सुरा, न जाने कितने नाम सही पर मेरे दिल मे हर समां, बस नाम रहा ये हमराही।