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बस इतना है तुझसे कहना।

तेरी यादों कि ठंडी छांँव मे आज भी मै जी रहा हूं वो आँधी थी वक्त कि या समय कुछ ऐसा था एक पल को आया था और अगले पल खत्म हो गया वो खुशबू का झौंका था और खुशीया ही खुशीया थी ना दिन थे ना रातें थी सिर्फ हमारी बातें थी ना मै कभी सोया था ना तुम कभी जागी थी दिन पड़ता छोटा था रातें भी आधी थी ना जाने धूप भरे रस्ते पर कोन सी ठंडी आँधी थी एक छोटे से सफर पर हर बात हमने बाँटी थी मंजीले तय कर ली थी जीवन के हर मोड़ की दूर हम थे बहुत, पर सपनो मे रातें काटी थी ना मै तेरे पास था ना तू मेरे पास थी पर आत्माओं का मिलन था और जन्नतों कि बातें थी हँसना,लड़ना,रूठना और मनाना ये रोज़ काकाम था पर ना मै कभी उदास था और ना तू कभी नाराज़ थी।
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प्रियतमा

कौन हो तुम, कहां हो तुम मै कहने की खता करु या खुद कुछ कहोगी तुम। एक भोली सी कन्या हो तुम या हुरों मे नूर हो तुम। चंचल चचंल नैनो वाली मृगतृषणा सी प्यास हो तुम। तप तप तपते रेगिस्तान मे सुखे गले कि आस हो तुम। वीना हो तुम, बीणा हो तुम हर कलाकार कि शान हो तुम बनारस की सुबह और अवध की शाम हो तुम। अरमान हो तुम फरमान हो तुम धडकते हुऐ दिल का ईमान हो तुम। मै अकेला हुं खडा़ इस दुनिया के झंझाल मे हमराज़ हो तुम एकजा़न हो तुम मै अगर शायर तो मेरा गुमान हो तुम। मै भटकता हुं कहीं इन अंधेरी राहों मे मेरी सूनी राहों की एक चमकती पहचान हो तुम। कोहिनूर कि खान हो तुम और मेरी मुसकान हो तुम। मेरे अधुरे जीवन कि एक पूरी दासतान हो तुम। कुछ पूछने कि हिम्मत करूं उम्मीद है कि नाराज़ न होगी तुम।  जैसे अब तक साथ दिया है क्या आगे भी साथ निभाओगी तुम। मै कहीं अगर गिर जाऊ तो प्यार से संभाल लेना। इस जनम काफी कष्ट सही क्या अगले जनम मे साथ आओगी तुम।

मुसाफिर तुझे सलाम

फिर एक शाम अभी ढल गई फिर एक सवेरा कल आएगा आज कोई हाथ छोड चला गया कल कोई जीवन नया पाएगा कभी कोई गम दूर चले गए अभी कोई गम हमे अपनाएगा ये जीवन का चलता पहियां है कभी धूप तो कभी छावं दिखलाएगा आशा और निराशा कि अजीब है कहानी कभी पतझड़ तो कभी वसंत छा जाऐगा हिम्मत और आस कि बुनीयाद है मेरे भाई सच्चे दिल से जीवन आसानी से कट जाऐगा हसना, रोना दो पहलू है जीवन के कभी एक दिखेगा तो कभी दूसरा आजाऐगा क्या कपड़ा क्या गहना क्या पैसा और मकान खाली हाथ आया था बंदे तू खाली हाथही जाएगा।

मेरी मांँ

सच्चे दिल से बोलू एक बात याद आ रही है वो सर्दियों कि अंधेरी बात याद आ रही है वो रजाइयों मे बैठना और मूंगफली खाना और अंधेरो मे मम्मी दिया जला रही है उस हवा कि ठंडक और भिनी खुशबू सुबह का कोहरा, मक्खन और मलाई याद आ रही है।
तू साथ थी न मगर, मेरा साथ बना ये हमराही तू छोड़ कर बड़ी दूर गई, मेरे साथ रहा ये हमराही न सुनता था मेरी बात कोई, सिर्फ समझ सका ये हमराही सबने हाथ छोड़ दिया, तब हाथ बना ये हमराही। रातो मे मै था अकेला, नींद ना आती चैन ना आता कौन लोरी गाता और सुलाता वो प्यार बना ये हमराही अंधेरो से मै घिर चुका था,ना साथ कोई था सधने को उस तमस को चीड़ फाड़ कर, मेरा साथ बना ये हमराही। चलते चलते थक गया था, रुक गया था, गिर गया था लाखो ठोकर खाके मन, चलने से ही डर गया था तब धक्का देकर कोई बोला, यहीं कहीं पर रुक नाही जो पीछे मुड़ कर देख रहा हुं, फिर वही खड़ा था हमराही। दारू मदिरा और सुरा, न जाने कितने नाम सही पर मेरे दिल मे हर समां, बस नाम रहा ये हमराही।

तेरी याद

तेरे आंचल को सीने से लगा के रोता हूं जब दिल करे तो आंंसू छुपा के रोता हूं तेरी हंसी तेरे होंठो पे आती रहे सदा अपने चहरे पे हंसी लगा के रोता हूं। मेरी गलतीयां थी मै जानता हूं सनम तुझे रोते हुऐ छोड़ आया हूं सनम आज भी मेरे दिल मे याद है तेरी तेरी याद को धड़कन बना के रोता हूं। तू खुश रहे सदा ये दुआ मै करता हूं मेरी हर दुआ मे तेरा नाम मै रखता हूं मेरी जिंदगी कि खुशी सब हो जाये तेरी तेरे हर गम को कर के याद मै रोता हूं। काश ये समय फिर से लौट जाये मै तेरा और तू मेरी हो जाये मिट जाये सब दूरीयां अपने दरमीयां अब तो इस मजा़क को सोच के रोता हूं तेरी हंसी को सुन के बहुत चैन आता था तेरी आंखो कि चमक से दिल जगमगाता था तेरी बांते कभी लगती थी दिल पे उन बांतो पे भी प्यार आता था इन्ही सब बातो को दोहरा कर रोता हूं अपने चहरे पे हंसी लगा के रोता हूं।